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Poems / Articles

ग़ाज़ियाबाद को दिल्ली से जोड़ने वाली कड़ी है "इंदिरपुरम"। चारो ओर बहुमंजिला इमारतें, जगमग करते माल, सड़कों की शोभा बढ़ाती चमचमाती कारें, फैशनेबल कपड़ों में लिपटे युवक व युवतियां आज इंदिरपुरम की पहिचान हैं । गॉव व छोटे शहरों से लिकले हज़ारों लोग आज इंदिरपुरम की शान हैं ।

इंदिरपुरम में ऊँची ऊँची इमारतों के बीच एक और जीवंत स्थान है ‘इंदिरपुरम हाट’। इंदिरापुरम के मध्य दिल्ली हाट की तर्ज पर G.D.A. द्वारा विकसित किया गया ‘इन्दिरापुरम हाट’, यहाँ के निवासियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है।   

भोर होते होते काफी संख्या में युवा व बुजुर्ग यहाँ आकर इस स्थान की शोभा बढ़ाते हैं। हजारों पेड़ पौधों के बीच कुछ वाक करते हैं, कुछ दौड़ लगाते हैं, अनेक वयायाम कर सेहत बनाते हैं तो कुछ योग के माध्यम से नयी ऊर्जा पाते हैं।  रोज़ लाफ्टर थेरपी का लाफ्टर दूर से सुना जा सकता है। सेहत प्रेमीयो के लिए जूस का प्रबंध कर हॉकर सुबह सुबह  बौनी भी कर लेते हैं ।    

शाम के समय बच्चों, महिलाओं आदि के यहाँ आने के कई बहाने भी हैं, जैसे: हस्तशिल्प को प्रदिर्शित करती अनेक दुकानें, विभिन्न व्यंजनों से सजे स्टॉल, पर्याप्त पार्किंग की  सुविधा । यहाँ का खुला रंगमंच तोह हर कलाकार को लुभाने के लिए पर्याप्त है।

यहां समय समय पर मेलों, प्रदर्शनिओं तथा संस्कृत कार्यकमो का भी आयोजन किया जाता है, जिसका इन्तजार लोग कई हफ्तों पहले से करते हैं।

उन दिनों यहाँ की रोनक कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि इसके तहत महिलाओं के फैशनेबल कपड़ों, परंपरागत और फंकी जूलरी, कॉस्मेटिक्स, फरफ्यूम जैसे बहुत सारे लाइफस्टाइल प्रॉडक्ट उपलब्ध होते हैं। यहां घर की सजावट की चीजें भी उपलब्ध होती हैं। यहां कई नए ब्युटी ब्रांड भी अपने प्रॉडक्ट और सर्विसेज की प्रदर्शनी  लगते हैं।

यहां समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। यहां आप कवि सम्मेलन, नृत्यि और संगीत का भी आनंद उठा सकते हैं।

अगर आप अभी तक यहाँ नहीं गए है तो एक बार अवश्य जाये, ताकि आप बार बार जाये और जीवन का आनंद ले पायें

- आर. पी. शर्मा

7838656900

*दो महिलाएं बातें करती हुईं*

 

मोटापा बढ रहा है

 

इसीलिये...

आजकल *बाहर खाना*

बिलकुल बंद कर दिया है..

 

*पैक कराकर* घर लाती हूं

और *फ़िर* खाती हूं !! 😜

🍔🍕🍱😂😂😂

साजन! होली आई है!
सुख से हँसना
जी भर गाना
मस्ती से मन को बहलाना
पर्व हो गया आज-
साजन ! होली आई है!
हँसाने हमको आई है!

साजन! होली आई है!
इसी बहाने
क्षण भर गा लें
दुखमय जीवन को बहला लें
ले मस्ती की आग-
साजन! होली आई है!
जलाने जग को आई है!

साजन! होली आई है!
रंग उड़ाती
मधु बरसाती
कण-कण में यौवन बिखराती,
ऋतु वसंत का राज-
लेकर होली आई है!
जिलाने हमको आई है!

साजन ! होली आई है!
खूनी और बर्बर
लड़कर-मरकर-
मधकर नर-शोणित का सागर
पा न सका है आज-
सुधा वह हमने पाई है !
साजन! होली आई है!

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